मध्य पूर्व में जारी ईरान-इज़राइल युद्ध लगातार फैलता जा रहा है और अब इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। हालिया घटनाओं ने इस संघर्ष को और अधिक गंभीर बना दिया है।
इराक ने तेल बंदरगाहों का संचालन रोका
इराक ने अपने कुछ प्रमुख तेल बंदरगाहों पर कामकाज अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह कदम दो विदेशी तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद उठाया गया। रिपोर्टों में कहा गया है कि इन हमलों में ड्रोन बोट और समुद्री बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
इसी दौरान बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब ने अपने हवाई क्षेत्र में कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है।
बेरूत पर इज़राइली हमले जारी
इज़राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले जारी रखे हैं। इन हमलों के कारण कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर है और हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
दक्षिणी लेबनान के कस्बे क्लाया में एक पादरी, फादर पियरे अल-राही, की मौत भी कथित रूप से इज़राइली गोलीबारी में लगी चोटों के कारण हुई।
युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की तीन शर्तें
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने युद्ध समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
- ईरान के वैध अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता
- युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
- भविष्य में किसी भी आक्रमण को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी
होरमुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
दूसरी ओर ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह संघर्ष कूटनीतिक रास्ते से सुलझेगा या क्षेत्र में एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।






















