**महिला आरक्षण बिल पर संसद में टकराव: विपक्ष परिसीमन प्रावधानों का करेगा विरोध**

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भारत · राजनीति

सरकार 16 अप्रैल को लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का बिल संसद में लाएगी, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। विपक्षी दल महिला आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ हैं, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व घट सकता है।

सरकार अगले सप्ताह संसद के विशेष सत्र में तीन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल दो विधेयक पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह एक विधेयक प्रस्तुत करेंगे। इन विधेयकों में संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियां

विपक्षी दल सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ जनसंख्या आधार में परिवर्तन को केंद्रीय मुद्दा मानते हैं। खड़गे के अनुसार, परिसीमन 1971 की जनसंख्या के बजाय 2011 की जनगणना पर आधारित होगा, जिससे जनसंख्या वृद्धि दर अधिक वाले उत्तरी राज्यों को अधिक सीटें मिलेंगी। दक्षिणी राज्य इससे प्रभावित होंगे।

तमिलनाडु के राजनेता विजय ने चेतावनी दी कि यह संशोधन दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर बढ़ाएगा। विपक्ष का मानना है कि यह संवैधानिक संशोधन अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के हितों को प्रभावित करेगा।

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"हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है ताकि विपक्ष को दबाया जा सके। इसलिए हमने परिसीमन बिल के विरोध का निर्णय लिया है।"
— मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष

महिला आरक्षण की अवधि और विवरण

प्रस्तावित योजना में 273 महिलाओं को लोकसभा में आरक्षित सीटें मिलेंगी, जो कुल सीटों का 33 प्रतिशत है। यह आरक्षण 15 वर्षों के लिए होगा, अर्थात् 2029, 2034 और 2039 के आम चुनावों तक। इसके बाद संसद इसे विस्तारित करने का निर्णय लेगी। आरक्षित सीटें हर चुनाव में विभिन्न क्षेत्रों में घूमेंगी ताकि महिलाओं का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि यह प्रस्ताव सत्ता पर कब्जा के लिए परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों में मनमानी करने की कोशिश है। उन्होंने दक्षिणी, उत्तर-पूर्वी और छोटे राज्यों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की वकालत की। DMK नेता टी आर बालू ने 2023 में पारित मूल विधेयक को उसी रूप में लागू करने का सुझाव दिया।

##FACTBOX##
**मुख्य तथ्य**
• लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव
• 273 सीटें (33%) महिलाओं के लिए 15 वर्षों के लिए आरक्षित होंगी
• परिसीमन 1971 की जगह 2011 की जनगणना पर आधारित होगा
• विपक्षी दल परिसीमन प्रावधानों के विरुद्ध मतदान करेंगे
• 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए

Analysisविश्लेषण: यह विवाद महिला आरक्षण नीति और उसके कार्यान्वयन के तरीके को लेकर आंतरिक विभाजन को दर्शाता है। विपक्ष के प्रमुख पक्षों का दावा है कि परिसीमन में परिवर्तन जनसंख्या वृद्धि दर के आधार पर क्षेत्रीय हितों को असमान रूप से प्रभावित करेगा। सरकार के पास इस चिंता का जवाब देना शेष है कि कैसे यह व्यवस्था संघीय ढांचे में संतुलन बनाए रखेगी।

संसद में अगले सप्ताह होने वाली 18 घंटे की बहस महिला आरक्षण जैसी प्रगतिशील नीति और परिसीमन के संवैधानिक निहितार्थों के बीच तनाव को स्पष्ट करेगी। क्या सरकार विपक्ष की आशंकाओं को दूर करने के लिए परिसीमन में संशोधन लाएगी, यह सवाल अभी बना हुआ है।

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