अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की राजनीतिक साझेदारी लंबे समय से वैश्विक राजनीति में प्रभावशाली रही है। ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान इस रिश्ते का सबसे बड़ा और जोखिम भरा कदम माना जा रहा है।

ट्रंप के फैसलों से इज़राइल को कूटनीतिक बढ़त
ट्रंप के कार्यकाल के दौरान इज़राइल को कई बड़े कूटनीतिक लाभ मिले। उन्होंने अमेरिकी दूतावास को येरुशलम स्थानांतरित किया, गोलान हाइट्स पर इज़राइल की संप्रभुता को मान्यता दी और Joint Comprehensive Plan of Action से अमेरिका को बाहर कर दिया। इन फैसलों को इज़राइल की दक्षिणपंथी राजनीति की बड़ी जीत के रूप में देखा गया।
ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान
फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की। इसे Iraq War के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती में से एक बताया जा रहा है। नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन को ऐसी खुफिया जानकारी दी थी कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei और उनके करीबी अधिकारी एक ही स्थान पर मौजूद हैं। इसके बाद सैन्य कार्रवाई का निर्णय लिया गया।
हालांकि कई विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से पूरे मध्य-पूर्व में तनाव और अस्थिरता बढ़ सकती है।
घरेलू राजनीति पर असर
यह युद्ध दोनों नेताओं के लिए घरेलू राजनीति में भी बड़ा जोखिम बन सकता है। इज़राइल में इस साल चुनाव होने हैं और 2023 में Hamas के हमले के बाद नेतन्याहू की लोकप्रियता पर असर पड़ा था। माना जा रहा है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई से वे जनता का समर्थन दोबारा मजबूत करना चाहते हैं।
वहीं अमेरिका में भी इस युद्ध को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ट्रंप के कुछ समर्थक विदेशों में सैन्य हस्तक्षेप के विरोधी रहे हैं। इसके अलावा युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है, जिसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और चुनावी माहौल पर पड़ सकता है।
क्या यह नेतन्याहू के करियर का टर्निंग पॉइंट होगा?
हालांकि ट्रंप और नेतन्याहू के संबंध हमेशा पूरी तरह एक जैसे नहीं रहे। कई मौकों पर ट्रंप ने इज़राइल की कुछ योजनाओं पर रोक भी लगाई और फिलिस्तीनी राज्य के लिए संभावित रास्ते की बात भी की।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान के खिलाफ यह युद्ध नेतन्याहू के राजनीतिक करियर को नई ताकत देगा या यह उनके लंबे राजनीतिक सफर का अंतिम अध्याय साबित होगा। आने वाले महीनों में मध्य-पूर्व की राजनीति और इज़राइल की आंतरिक स्थिति इस सवाल का जवाब तय करेगी।





















