महिला आरक्षण विधेयक के बीच पंजाब विधानसभा में महिला प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड खस्ता हाल

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पंजाब · चुनाव राजनीति

पंजाब विधानसभा चुनावों के आंकड़े दिखाते हैं कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व ऐतिहासिक रूप से 10 प्रतिशत से भी कम रहा है। राष्ट्रीय महिला आरक्षण विधेयक पर बहस जारी है जबकि राज्य का चुनावी इतिहास एक अलग कहानी कहता है।
117 पंजाब विधानसभा में कुल सदस्यों की संख्या
92022  चुनाव में निर्वाचित महिला सदस्य
7.7% महिला सदस्यों का वर्तमान प्रतिशत विधानसभा में

पंजाब की विधानसभा में महिलाओं की संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में अत्यंत कम है। 2022 के विधानसभा चुनावों में कुल 117 सदस्यों में से महज नौ महिलाएं निर्वाचित हुईं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय महिला आरक्षण अधिनियम के संदर्भ में गंभीर प्रश्न खड़े करता है जो 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित करने की मांग करता है।

महिलाओं की प्रतिनिधिता का ऐतिहासिक पहलू

पंजाब के चुनावी इतिहास में महिलाओं की भागीदारी क्रमिक दशकों में भी उल्लेखनीय वृद्धि नहीं दिखाई दी है। 1990 के दशक में महिला सांसदों की संख्या 5 प्रतिशत के आसपास थी। 2000 के बाद इसमें कुछ सुधार आया किंतु 10 प्रतिशत की सीमा को पार करना आज भी एक चुनौती रही है। राज्य सरकार के अभिलेखों के अनुसार महिला उम्मीदवारों को टिकट वितरण में भी वरीयता नहीं मिली है।

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. सिमरन कौर का मानना है कि “परंपरागत राजनीतिक संरचनाएं और स्थानीय सामाजिक मानदंड महिला राजनेताओं के विकास में बाधक रहे हैं।” पंजाब की विधानसभा में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की कुल संख्या भी 20 से 25 प्रतिशत के बीच ही रहती है जो राष्ट्रीय औसत से कम है।

“पंजाब की राजनीति में महिलाएं आंदोलन और सामाजिक कार्य में तो अग्रणी रहीं किंतु संस्थागत राजनीति में उन्हें सीमित अवसर मिले हैं।”

— डॉ. सिमरन कौर, राजनीतिक विश्लेषक

आरक्षण विधेयक की राष्ट्रीय गतिविधि

संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के बाद पंजाब जैसे राज्यों को अपनी विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करनी होंगी। यह विधेयक अगले आम चुनाव से पहले लागू होगा। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस संबंध में तैयारी के निर्देश दिए हैं।

पंजाब के मुख्य चुनाव आयुक्त के अनुसार राज्य पहले से ही इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए प्रशासनिक ढांचे तैयार कर रहा है। सीटों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया आने वाले महीनों में शुरू की जाएगी। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस कदम का स्वागत किया है परंतु कार्यान्वयन को लेकर कुछ तकनीकी चुनौतियां भी उजागर हुई हैं।

KEY FACTS
• 2022 चुनाव में पंजाब विधानसभा में 9 महिला सदस्य निर्वाचित
• महिलाओं का वर्तमान प्रतिनिधित्व 7.7 प्रतिशत कुल 117 सदस्यों में
• नारी शक्ति वंदन अधिनियम 33 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य करता है
• महिला उम्मीदवारों की संख्या कुल टिकटों का 20-25 प्रतिशत रहती है
• राष्ट्रीय औसत महिला विधायकों का 12 प्रतिशत है भारत में

आरक्षण कार्यान्वयन में व्यावहारिक चुनौतियां

पंजाब में आरक्षण की नीति को लागू करने में कई जटिलताएं आएंगी। विधानसभा की 117 सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने से मौजूदा सीमांकन को दोबारा तैयार करना होगा। इसमें भौगोलिक और जनसंख्या आधारित पुनर्गणना की आवश्यकता होगी जो एक समय साध्य प्रक्रिया है।

राजनीतिक दलों के बीच सीटों के आवंटन को लेकर भी विचारों में मतभेद हो सकता है। कुछ पार्टियों की चिंता है कि आरक्षण से उनकी प्रतिष्ठित सीटें प्रभावित हो सकती हैं। महिला राजनीतिज्ञों की एक संस्था ने तर्क दिया है कि आरक्षण केवल संख्या का मुद्दा नहीं है बल्कि महिला उम्मीदवारों को प्रभावी मंच और संसाधन भी देने होंगे।

Analysisपंजाब का चुनावी इतिहास यह दर्शाता है कि राजनीतिक संरचनाएं स्वेच्छा से महिलाओं को उच्च पद नहीं देती हैं। संवैधानिक आरक्षण का प्रावधान एक बाहरी दबाव का काम करता है जो राजनीतिक दलों को महिला नेतृत्व विकसित करने के लिए बाध्य करता है। आने वाले चुनावों में इस नीति के वास्तविक प्रभाव को देखना होगा कि क्या महिलाएं केवल सीटों तक सीमित रहेंगी या नीति निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभा पाएंगी।

पंजाब की विधानसभा में महिलाओं की बढ़ती संख्या निश्चित रूप से आएगी किंतु असली सवाल यह है कि क्या ये महिलाएं राज्य की राजनीति में वास्तविक परिवर्तन ला सकेंगी या फिर नाममात्र प्रतिनिधित्व होकर रह जाएगा।

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