यरुशलम, 10 मार्च: मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch – HRW) ने आरोप लगाया है कि इज़राइली सेना ने 3 मार्च को दक्षिणी लेबनान के योहमोर (Yohmor) शहर के रिहायशी इलाकों के ऊपर व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया, जिससे आम नागरिकों की जान को खतरा पैदा हुआ।
HRW के लेबनान शोधकर्ता रमज़ी कैस ने कहा कि व्हाइट फॉस्फोरस एक अत्यंत खतरनाक पदार्थ है, जिसकी आग से गंभीर जलन, स्थायी चोटें और कई मामलों में मौत भी हो सकती है। उनका कहना है कि ऐसे हथियारों का आबादी वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन हो सकता है।
संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने आठ तस्वीरों और वीडियो की पुष्टि की है, जिनमें योहमोर के रिहायशी इलाके के ऊपर व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल के संकेत दिखाई देते हैं। इन फुटेज में नागरिक सुरक्षा कर्मियों को आग बुझाने की कोशिश करते हुए भी देखा गया है।
हालांकि, समाचार एजेंसी Reuters इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।
इज़राइली सेना ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे लेबनान में व्हाइट फॉस्फोरस वाले गोले इस्तेमाल होने की कोई जानकारी नहीं है। सेना ने यह भी कहा कि उसने HRW द्वारा बताए गए वीडियो नहीं देखे हैं, इसलिए फिलहाल इन आरोपों पर टिप्पणी करना संभव नहीं है।
इस बीच लेबनान के अधिकारियों की ओर से भी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इज़राइली सेना ने 3 मार्च को जारी एक बयान में योहमोर समेत करीब 50 गांवों और कस्बों के लोगों को इलाका खाली करने का निर्देश दिया था।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 2023 में इज़राइल पर दक्षिणी लेबनान में व्हाइट फॉस्फोरस के इस्तेमाल के आरोप लगे थे। लेबनान की नेशनल काउंसिल फॉर साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार अक्टूबर 2023 से जुलाई 2024 के बीच दक्षिणी लेबनान में 175 हमलों में व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल किया गया, जिससे 600 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि प्रभावित हुई।
व्हाइट फॉस्फोरस का इस्तेमाल सैन्य अभियानों में धुआं पैदा करने, रोशनी देने या लक्ष्यों को चिन्हित करने के लिए किया जाता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल अवैध माना जाता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि व्हाइट फॉस्फोरस को Convention on Certain Conventional Weapons के प्रोटोकॉल-III के तहत आग लगाने वाले हथियारों की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि इज़राइल ने इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए वह इसके नियमों से कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में लेबनान पर हुए इज़राइली हमलों में करीब 400 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।






















