
ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को शरण दे दी है। ये खिलाड़ी एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया आई थीं और बाद में उन्होंने सुरक्षा की मांग की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, खिलाड़ियों को डर था कि अगर वे ईरान लौटती हैं तो उन्हें सरकारी कार्रवाई या सज़ा का सामना करना पड़ सकता है। इसी कारण उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि यह मामला तब चर्चा में आया जब मैच से पहले ईरान का राष्ट्रीय गान बजने के दौरान कुछ खिलाड़ियों ने उसे गाने से परहेज़ किया। इसे ईरान में राजनीतिक विरोध के रूप में देखा जा सकता है, जिसके कारण खिलाड़ियों को संभावित कार्रवाई का डर था।
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने मानवीय आधार पर इन खिलाड़ियों को अस्थायी सुरक्षा और वीज़ा प्रदान किया है। सरकार का कहना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।
यह घटना अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में भी चर्चा का विषय बन गई है। कई मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि खिलाड़ियों को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
दूसरी ओर, ईरान की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना खेल और राजनीति के बीच संबंधों को फिर से चर्चा में ले आई है, जहां खिलाड़ी कभी-कभी अपने विचारों के कारण जोखिम का सामना करते हैं।






















