
बीबीसी के रिपोर्ट के अनुसार, आज अमेरिका-ईरान युद्ध अपने सबसे तीव्र चरण में है। तेहरान में हुए हमलों की जानकारी देते हुए, बीबीसी ने बताया कि इज़राइल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में लाखों लोगों को आज तीन बार मिसाइल हमले की चेतावनी पर शरण लेनी पड़ी। हिज़्बुल्लाह द्वारा लेबनान से जारी ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते, उत्तरी इज़राइल में आज 30 से अधिक चेतावनियाँ जारी हुईं। इज़राइली सेना ने तेहरान में रिवॉल्यूशनरी गार्ड के एक भूमिगत हथियार अनुसंधान परिसर पर हमला करने की बात कही।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका उद्देश्य ईरानी धार्मिक नेतृत्व को कमजोर करना है, और उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरानी लोग खुद “तानाशाही के जुए” को तोड़ेंगे। इससे पहले, 28 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरानी जनता से अपनी सरकार बदलने की अपील की थी।
अब, भारत के दृष्टिकोण से, यह संघर्ष केवल दूर की खबर नहीं है। मध्य-पूर्व भारत के लिए एक प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है, और क्षेत्रीय अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक हितों पर असर डाल सकती है। भारत, जो परंपरागत रूप से सभी पक्षों के साथ संवाद पर जोर देता है, इस स्थिति में शांति और बातचीत का समर्थन करता है। भारत की नीति, गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित है, जो सभी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है। इस संकट के बीच, भारत की प्राथमिकता रहेगी कि किसी भी तरह की क्षेत्रीय अस्थिरता को कम किया जाए, ताकि शांति और सहयोग बना रहे।






















